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आफत आसमानी तबाही का संदेश लेकर आ गई

dinesh chauhan

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                            आफत आसमानी तबाही का संदेश लेकर आ गई
        
                                                    
                            
सूरज छुप गया नभ पर फिर से बदलियां छा गईं.

घर गिरे लकड़ियां भीगी छतें टपक रहीं बारिश से
चूल्हे बिखर गये भीग के फिर से बदलियां छा गईं.

रास्ते कच्चे दलदल हुए मेड़ो पर फिसलन बढ़ गई
खटिया संग कथरी गीली फिर से बदलियां छा गईं.

गेहूं गीला आटा खत्म , दाल भी पेंदी तक आ गई
सब्जियां मंहगी हुई और फिर से बदलियां छा गईं.

भैंस भीगी दूध नहीं हुआ , कच्ची दीवार ढा गई
मुसीबतें कम नहीं हुईं फिर से बदलियां छा गईं.
-दिनेश चौहान
एक महीने पहले
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