वो कोई और होगा
जो डर गया होगा
यहां आग है सारी
हर शख्स तवा होगा.
मरीजे इश्क हर कोई
जुबां चुप है हर कोई
है पत्थर हाथ में सबके
जरूर मजनूं दिखा होगा.
पहाड़ों की हवाओं से
जो पंगा ले लिया उसने
पकड़ पैरों की मजबूती
कोई पीछे रहा होगा.
बड़ी तहजीब से कह दी
सलीके से बात भी अपनी
बुजुर्गों की नसीहत से
वो बरसों तक पला होगा.
ज़मीं रेहन रखकर के
पढ़ाया अपनी बहनों को
डूबा कर कर्ज में खुद को
फिर जम कर हँसा होगा.
-दिनेश चौहान