तबाही का मंजर
बारिश का खंजर
गरीब के सीने पर
उतर गया फिर .
दीवार गिर गई
रोटियां दब गईं
भूख उभर आई
आंखें धंस गईं.
खपरैल की बस्ती
टूटी हर गृहस्थी
बाढ़ जम कर आई
जिंदगानी बह गई.
मरे मजदूर की
जेबें तलाशते
कुछ नहीं पाते
बहुत ही गरियाते.
चलते हुए कैमरे
तड़पते मरते लोग
उपदेश देते चलते
जीवन मरण योग.
-दिनेश चौहान