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बैठ मयखाने में जो पी रहे हैं

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पेट के लिए ही तो जी रहे हैं
        
                                                    
                            
सारे गम दुनिया के पी रहे हैं.

जिन्दगी मौत के सौदाई भी
जहर तन्हाई का पी रहे हैं.

ले हथेली आचमन जो कर रहे
तेजाब जैसा.ही आब पी रहे हैं.

इश्क जिन्दगी में करने वाले
घूंट घूंट दर्द का जाम पी रहे हैं.

सफ़र कट जायेगा उनका भी
बैठ मयखाने में जो पी रहे हैं.
-दिनेश चौहान
एक महीने पहले
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