विज्ञापन

सियासत

Dilshad Ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बाद-ए-नफ़रत जो
        
                                                    
                            
साहिब-ए-तख़्त हो गए।
खुशहाली,तरक्की,कारोबार की ख्वाहिश मत रखना।
ये सियासत है।
बाद-ए-ख़िज़ाँ भी उम्मीद-ए- निजात मत राखना।

दिलशाद...
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

437 कविताएं

View Profile

Pandit Chandradutt

2936 कविताएं

View Profile