क्या जरूरत है किसी की इज्जत से खेलने की।
क्या जरूरत है दिखा कर कुछ देने की।
अरे देना ही है तो रात के अंधेरे में तो दो यारों।
दिन में तो फकीर भी फकीरों को दिया करते हैं।