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दिल का देहात

मयंक कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी आँखों में और देहात मत देना
        
                                                    
                            

मेरे हिस्से में और इंतजार मत देना


दिल की बस्ती में एक पूस का घर है

धीरे से उतरना इसे और घाव मत देना

मिट्टी की दीवार-सा नादान मेरा मोहब्बत है

धीरे से भीगाना इसे और बरसात मत देना

खामोशी से मोहब्बत के मलबे उठाना

किसी गाँव को और फसाद मत देना

मोहब्बत में कई दाग वे दे चुके हैं "मयंक"

अब मत लिपटना उन्हें और प्यार मत देना

© मयंक कुमार
स्वरचित


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7 वर्ष पहले
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