मेरी आँखों में और देहात मत देना
मेरे हिस्से में और इंतजार मत देना
दिल की बस्ती में एक पूस का घर है
धीरे से उतरना इसे और घाव मत देना
मिट्टी की दीवार-सा नादान मेरा मोहब्बत है
धीरे से भीगाना इसे और बरसात मत देना
खामोशी से मोहब्बत के मलबे उठाना
किसी गाँव को और फसाद मत देना
मोहब्बत में कई दाग वे दे चुके हैं "मयंक"
अब मत लिपटना उन्हें और प्यार मत देना
© मयंक कुमार
स्वरचित
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