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बीनत बाटी हम कबाड़

Dheeraj Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बीनत बाटी हम कबाड़,
        
                                                    
                            
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

माईया के ना बाबू जी के,
मिलल हमके प्यार,
बीनत बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

भिनन्हीं होत,
निकल जइला हम बजार,
फिर चाहे हो जाए दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

ना पंखा, ना एसी बा,
ना ही बा हमरे कउनो कार,
बीनत बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

फेंक दिहला पन्नी, रउरे खा के नमकीन,
फिर ओही से मिल जाला रुपया हमके दू-तीन,
ना चाहत बा,
ना चाही ले, खरीदे के पूरा संसार,

बिनात बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

बिता के रात,
मड़ई में, हमहूँ देखत बाटी संसार,
बीनत बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

लइका बा मड़ई में,
ओके लागल बा बोखार,
बिनात बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

हम ही बाटी पापी,
ना पापी बा संसार,
बीनत बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

माँगी ला ना केहू से,
आपन हाथ पसार,
बिनात बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

देख के दया खाले,
धीरज बार-बार,
बिनात बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार,

जियते-जी दू रोटी मिले,
एही सपना बा हमार,
बिनात बाटी हम कबाड़,
चाहे दिन-दोपहरिया, चाहे हो अन्हार...
2 महीने पहले
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