मातृभूमि
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भारत की इस मातृभूमि को,
सब मिलकर प्रणाम करें।
जो देती दो वक्त की रोटी,
सदा उसका गुणगान करें।
इस पर आँच क्षणभर भी आए,
तो जीवन कुर्बान करें।
भारत की इस मातृभूमि को,
सब मिलकर प्रणाम करें।।
वह अकेली सारे जग को,
आँचल से ओढ़ाए है।
हम संतान उस भूमि के,
जिसकी गोद में समाए हैं।
इसकी रक्षा धर्म हमारा,
नई दिशा पहचान करें।
भारत की इस मातृभूमि को,
सब मिलकर प्रणाम करें।।
शस्य-श्यामला माता मेरी,
अन्नपूर्णा कहलाती है।
कड़ी धूप में तपकर भी,
दुनिया को खिलाती है।
करुणा हृदय वाली माँ को,
कभी नहीं अपमान करें।
भारत की इस मातृभूमि को,
सब मिलकर प्रणाम करें।।
— धर्मेन्द्र कुमार