ज़िंदगी थम सी गयी है , रूक सी गयी है ।
न किसी के आने की आहट, न कहीं जाने की जिद ।
सबने बना ली है अपने , दायरे की हद ।
ज़िंदगी थम सी गयी है -----
खिलखिला के हंसना , मस्ती में झूमना,
सदियों की बातें हो गयी हैै ।
ज़िंदगी थम सी गयी है ----
यारों से मिलना - मिलाना ,
चाय की चुस्कियों के साथ बातें बनाना,
बीते लम्हों की यादें हो गयी है ।
ज़िंदगी थम सी गयी है , रूक सी गयी है।
-- D k Srivastava
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