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रात गई, बात गई

Devendra Pant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात गई, बात गई।
        
                                                    
                            

अगर ये ज्ञान है,
तो बहुत छिछला है।
अगर अज्ञान है,
तो बहुत गहरा है।

रात गई, बात गई।

अगर ये प्रेम है,
तो बहुत सस्ता है।
अगर ये छल है,
तो रात नहीं गई।

रात गई, बात गई।

अगर वहाँ मैं हूँ,
तो बहुत ओछा हूँ।
अगर वहाँ तुम हो,
तो रात गई—
बात नहीं।
-देवेन्द्र पंत
2 महीने पहले
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