विज्ञापन

आजकल के सफ़र में

Devendra Pant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बदलते हुए आजकल के सफ़र में,
        
                                                    
                            
हमें भी तो थोड़ा बदलना पड़ेगा।

दिखावे के जिस रास्ते हम हैं पहुंचे,
हर एक मोड़ पर अब संभलना पड़ेगा।

मोहब्बत में परवाना जलता है लेकिन,
शमा को भी घुट-घुट पिघलना पड़ेगा।

अब आँगन से आकाश तखने से क्या हो,
ये गलियाँ हैं संकरी, निकलना पड़ेगा।

दिल को भिगोना हो बारिश में 'देव '
तो बाहर निकल कर मचलना पड़ेगा I
-देवेन्द्र पंत
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all