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फिर आजाद हो जाओगे

Devashish Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ रोज संभल जाओ फिर आजाद हो जाओगे।
        
                                                    
                            
माना बुरे इस दौर में कुछ पल न फिर से पाओगे

ए शहर रूका हुआ मगर ख्वाहिश गंवारा ही नहीं
आदत हुई तो हर बला ऐसे ही तुम सह जाओगे

कुछ किताबें आज बन्द दरवाजों के पीछे देख लो
फिर कहीं ऐसा न हो के ताऊम्र तुम पशताओगे

देव यदुवंशी


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6 वर्ष पहले
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