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सितारों की शाम को

Devansh Kasaudhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रुला देते हैं कातिल
        
                                                    
                            
खुले आसमान को
बनते यूं मुलजिम हम
इश्क के पैगाम को
वक्त कहता इश्क पूछूं
इश्क कहता वक्त मांगू
बताते तहरीर अपनी
सितारों की शाम को
उनसे हुई गुफ्तगू
अरसों की बात लगती है
भुला देते है दिन दिन
हुस्न-ए-ला-जवाल जो
वक्त कहता इश्क पूछूं
इश्क कहता वक्त मांगू
बताते तहरीर अपनी
सितारों की शाम को
3 महीने पहले
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