विज्ञापन

साथ हैं हम तो सुहाना है सफ़र

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे बग़ैर थमी है ज़िन्दगी जैसे,
        
                                                    
                            
एक मुलाक़ात लाज़मी है जैसे।

तू नहीं तो कोई कमी नहीं लेकिन,
फिर भी लगती है कोई कमी जैसे।

तेरी पलकें झुकी झुकी क्यों हैं,
और आंखों में है एक नमी जैसे।

सबब कुछ तो है तेरी उदासी का,
और मिज़ाज भी है दरहमी जैसे।

तू मेरी मोहब्बत पर यक़ीन कर,
इस की तासीर है मरहमी जैसे।

कहीं ख़ुशी और कहीं पर ग़म है,
यही तो है रस्म-ए-आलमी जैसे।

साथ हैं हम तो सुहाना है सफ़र,
राहों में बिखरी है रौशनी जैसे।

"शमीम" हमनफ़स, हमदम हैं हम,
और तू ही है मेरी महरमी जैसे।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

priyanka samariya

8 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10819 कविताएं

View Profile

Kanojiya Manisha

10 कविताएं

View Profile