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नज़र मिलती है तो बेख़ुदी हो जाती है

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल का तेरे सिवा ठिकाना तो है नहीं,
        
                                                    
                            
तू मंज़िल है मेरी कहीं जाना तो है नहीं।

पाकर तुझे सारा जहाँ मिल गया मुझे,
अब तो हमें कुछ और पाना तो है नहीं।

तेरा साथ है, ज़िन्दगी कितनी हसीन है,
कोई भी सफ़र ऐसा सुहाना तो है नहीं।

नज़र मिलती है तो बेख़ुदी हो जाती है,
तेरी नज़र सा कोई मैख़ाना तो है नहीं।

साथ यूँ ही चलते रहें रह-ए-उल्फ़त पर,
मुश्किलें आएं तो रुक जाना तो है नहीं।

निसार करते हैं तुझ पर दिलो-जान हम,
इससे ज़्यादा कुछ हमें जताना तो है नहीं।

न शरमाओ इस तरह से क़रीब आ जाओ,
"शमीम" तेरा ही है कोई बेगाना तो है नहीं।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
एक महीने पहले
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