किसी से जब भी प्यार होता है,
दिल बहुत बेक़रार होता है।
तीर-ए-नज़र से वार होता है,
जिगर के आर-पार होता है।
दिल को चैन-ओ-सुकून होता है,
जब भी दीदार-ए-यार होता है।
ज़ुल्फ चेहरे से जब हटाते हो,
तो चाँद का दीदार होता है।
तुम नज़र से जब पिलाते हो,
बेख़ुदी और ख़ुमार होता है,
"शमीम" मेरे दिल धड़कन पर,
तुम्हारा इख़्तियार होता है।
-देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"