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हक़ीक़त

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हकीक़त को छुपाया जा रहा है,
        
                                                    
                            
दरोग़ सब बताया जा रहा है।

फ़रेब ही नज़र आता है हर सू,
ख़्वाब झूठा दिखाया जा रहा है

नाम पर जात और मज़हब के,
हम सभी को लड़ाया जा रहा है।

उजाला देखकर भरमा न जाना,
किसी का घर जलाया जा रहा है।

सर झुकाकर जो कभी आते थे,
उन्हीं को सर झुकाया जा रहा है।

सुना है आज-कल तो मंदिरों का,
चढ़ावा भी चुराया जा रहा है।

"शमीम" हर तरफ तिजारत है,
और हमें बरग़लाया जा रहा है।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
2 महीने पहले
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