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बुरा नहीं करते

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम किसी का कभी बुरा नहीं करते,
        
                                                    
                            
किसी के लिए भी बद्दुआ नहीं करते।

पहले की तरह हम मिला नहीं करते,
मगर कोई शिकवा गिला नहीं करते।

बहारें और ख़िज़ां तो आते हैं जाते हैं,
हरेक मौसम में गुल खिला नहीं करते।

तुम ख़फ़ा हो अगर तो हक़ तुम्हारा है,
जुदा इस तरह से तो हुआ नहीं करते।

कहते हैं वक्त हर ज़ख़्म भर देता है,
ज़ख़्म कुछ कभी भी भरा नहीं करते।

नहीं कहते के हम पीते नहीं "शमीम",
मगर पी कर कभी बहका नहीं करते।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
एक महीने पहले
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