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अम्नो-अमान के लिए

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चमन ये हमें ही सजाना पड़ेगा,
        
                                                    
                            
यहाँ फूलों को फिर खिलाना पड़ेगा।

ज़हर नफ़रतों का मिटाकर हमें,
मोहब्बत का जज़्बा जगाना पड़ेगा।

यहाँ पर हो कायम अम्नो-अमान,
अदावत दिलों से मिटाना पड़ेगा।

तअल्लुक है इंसानियत का हमारा,
इसे हम सभी को निभाना पड़ेगा।

नहीं टूट सकता हमारा ये नाता,
ये सारे जहाँ को दिखाना पड़ेगा।

कोई बरगलाए गर हम को "शमीम",
तो उसको सबक़ भी सिखाना पड़ेगा।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
एक दिन पहले
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