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शांति तो बसी है बस नीम की छाँव में

Dev Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुबह की पहली धूप ने जब आँखें खोलीं,
        
                                                    
                            
पेड़ों ने हवा में कुछ बातें बोलीं।

खेतों में सरसों जैसे सोना बिखरा है,
पंछियों ने नीले अम्बर में गीत लिखा है।

नदी चली है धीरे-धीरे गुनगुनाते हुए,
फूल खिले हैं ओस में मुस्कुराते हुए।

धरती की गोद में सुकून कितना है,
इस हरियाली में जादू कितना है।

हम भाग रहे हैं शहरों की भीड़ में,
शांति तो बसी है बस नीम की छाँव में।
3 दिन पहले
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