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हाँ मंजूरी है।

dev chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो कसमें खायी थी तुमने, वो हर कसम अधूरी है,
        
                                                    
                            
दिल से दिल का मेल हुआ,पर तन से तन की दूरी है।
जो कसमें,,,,,
कभी ख्वाबों में, धोखे से भी, मैंने तुमको छुआ नहीं,
नजरों से कहा,नजरों से सुना, इस उल्फत की कस्तूरी है।
जो कसमें,,,,,
जिस गुलशन की रौनक हो,उसको ही महकाओ तुम,
खुशबू मेरे दर तक आये, यह भी बहुत जरूरी है।
जो कसमें,,,
तुम रिश्ते, नाते, रस्मों की, जंजीरों में जकड़ी हो,
पर ख्वाबों में आ सकती हो, इसमें क्या मजबूरी है।
जो कसमें,,,,
अगले जनम का वादा है, तुम मेरी बनके आओगी,
मैं राह निहारूंगा जाकर, कहदो हाँ, मंजूरी है।
कहदो हाँ,, मंजूरी है।।
जो कसमें,,,,
दिल से दिल,,,,
-देवेन्द्र सिंह चौहान
 
एक घंटा पहले
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