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साथ मझधार में जब छूट गया अपनों का

Deepti Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी वैद्य के पास क्या ही दवा होगी,
        
                                                    
                            
दर्द जब मन का हो तो कैसे शिफ़ा होगी।

साथ मझधार में जब छूट गया अपनों का,
गैर की कश्ती में अब कितनी जगह होगी।।
-दीप्ति त्रिपाठी
2 घंटे पहले
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