मां बाप की प्यारी होती हैं बेटियां,
सुख का सागर होती हैं बेटियां |
घर के आंगन को महकाने वाली,
घर की फुलवारी होती हैं बेटियां।
बिन बेटियों के सब त्यौहार भी सुने,
सुने पड़ जाते सावन के भी झूले।
घर के हर रस्म रिवाज़ों में भी,
बिन बेटियों के सब सगुन भी सूने।
ऐसी प्यारी बेटियां सिर्फ़,
किस्मत वालों को ही मिलती हैं।
झोली भरती उनकी ख़ुशी से,
जब वो उनके घर में पैदा होती हैं।
आओ हम सब मिलकर के,
कसम खायें एक साथ।
बेटियों का अस्तित्व बचाना ही,
अपना हो पहला अधिकार।
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