जीवन की हर बात की ज़ुबानी नहीं होती,
क्योंकि कुछ क़िस्सों की कहानी नहीं होती।
यूं तो इलाज़ करने बैठे हैं सभी यहाँ,
पर कैसे बताएं उन्हें कि दिले-दर्द की कोई दवाई नहीं होती।
राह ना मिले तो लोग छोड़ देते हैं मंज़िलें ख़्वाहिश,
पर ऐसी कोई मंज़िल नहीं जिसकी राह नहीं होती।
रूठे तो अपने भी हैं हमसे इस जहाँ में,
पर याद रखना कि हर रूठना रुसवाई नहीं होती।
बिछड़ते तो सभी हैं अपनों से पर हर बिछड़न जुदाई नहीं होती।
-: दीपिका सिंह