संगीत क्या है…?
सिर्फ़ सुरों का
साथ-साथ चलना नहीं,
कभी किसी ख़ामोशी का
दिल में उतर जाना भी संगीत है।
माँ की लोरी संगीत है,
पिता की ख़ामोशी संगीत है,
प्रेम में धड़कता दिल संगीत है,
और किसी अपने की याद में
भीगती आँखें भी संगीत हैं।
कभी कोई आवाज़
टूटे हुए मन को थाम लेती है,
कभी कोई मुस्कान
उदास शाम को सजा देती है,
और कभी बिना कहे
कोई अपना सब कुछ कह जाता है।
दर्द जब लफ़्ज़ नहीं खोज पाता,
तो आँसू बनकर बहता है—
और वही आँसू
कभी-कभी सबसे सच्चा गीत बन जाता है।
ज़िंदगी भी तो
एक अनोखी धुन है—
कहीं सुर मिलते हैं,
कहीं ताल बिगड़ती है,
कहीं कोई अपना बिछड़ता है,
तो कहीं अनजान सफ़र में
कोई अपना मिल जाता है।
हर धड़कन की अपनी ताल है,
हर रिश्ते की अपनी धुन,
हर ख़ामोशी का अपना सुर,
और हर इंसान के भीतर
एक अनसुना गीत है।
फ़र्क बस इतना है—
कुछ लोग उसे गुनगुना देते हैं,
और कुछ लोग
उसे उम्र भर
अपने भीतर सँजोए रखते हैं।
संगीत आवाज़ नहीं,
एक एहसास है…
जो कानों तक पहुँचकर
वहीं ठहर जाए—
वो सिर्फ़ धुन है।
जो दिल को छूकर
रूह में उतर जाए,
वही संगीत है।
और शायद
ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत संगीत
वही होता है—
जिसे दुनिया नहीं सुनती,
मगर दिल
उम्र भर गुनगुनाता रहता है।