बबुरी गाँव की पावन भूमि पर आना ही पड़ेगा,
बाबा खुशियाल-दुलम की महिमा को गाना ही पड़ेगा।
हुए कितने यहाँ संत महान, जिनकी महिमा है अपरम्पार,
इस पावन कुटिया में आकर के शीश झुकाना ही पड़ेगा।
अरे, बबुरी गाँव की पावन भूमि पर आना ही पड़ेगा॥
बाबा खुशियाल दास की तपोस्थली ये भारी,
बाबा दुलम दास ने भी की साधना न्यारी।
इन संतों के चरणों की धूल को माथे लगाना ही पड़ेगा,
बाबा खुशियाल-दुलम की महिमा को गाना ही पड़ेगा।
अरे, बबुरी गाँव की पावन भूमि पर आना ही पड़ेगा॥
मुख से कही न जाए ऐसी महिमा दिखाई,
तप करके संतों ने ये पावन धरा बनाई।
सब दुःख-दर्द मिटेंगे यहाँ, तुमको विश्वास जगाना ही पड़ेगा,
बाबा खुशियाल-दुलम की महिमा को गाना ही पड़ेगा।
अरे, बबुरी गाँव की पावन भूमि पर आना ही पड़ेगा॥
रोज़ होती है कथा यहाँ, कीर्तन की गूँज प्यारी,
जो भी शरण में आया, खुशियाँ मिली हैं सारी।
भक्ति के इस पावन रंग में खुद को रंगाना ही पड़ेगा,
बाबा खुशियाल-दुलम की महिमा को गाना ही पड़ेगा।
अरे, बबुरी गाँव की पावन भूमि पर आना ही पड़ेगा॥