"एक है दिपक मगर जलता नहीं है
समय के साथ वो चलता नहीं है
मासुम चेहरा भीड़ का पहरा, फिर भी वो चिल्लाता है
बड़े होने के बाद उसको बचपन याद आता है।
खेल कूद कर आया घर पर,रात का खाना हो गया
मां बोली कल स्कूल जाना है,वो रोते-रोते सो गया
छूट जाएगा वो हंसी ठिठोली ये सोचकर घबराता है
बड़े होने के बाद उसको बचपन याद आता है।।
मन में डर रुह में कंपन ,सर को देख घबराता है
पास में बैठी मां को देख कर, फिर वो खुश हो जाता है
हाथ में बस्ता लंबा रस्ता, फिर रोज वो स्कूल जाता है
एक दिन कि छुट्टी मिलती, मस्ती मौज उड़ाता है
बड़े होने के बाद उसको बचपन याद आता है।।।