विज्ञापन

यादों का अजीब खेल है.

Deepa Malik

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यादों का भी अजीब खेल है यारों 
        
                                                    
                            
कभी खुशी बनकर आती है तो कभी गम,

जब कभी भी आती है लेकिन
फिर से कोई एहसास करा जाती है।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all