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वही शाम जिसके इंतजार में दिन कटता हो,

Damini Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वही शाम जिसके इंतजार में दिन कटता हो,
        
                                                    
                            
वही शाम जिसके आने से रात संवर जाती हो।
वही शाम जिसका रंग खल में पिस्ती हल्दी सा हो,
वही शाम जो धीरे धीरे माथे के कुमकुम सी ढल जाती हो।
वही शाम जिसको देख होंठों पे मुस्कान शुरू हो और गर्म चाय की प्याली पे खत्म हो जाती हो,
वही शाम जिसका आना भी चंद लम्हों का हो जैसे रौशनी का चेहरा धीरे धीरे अपना मुखड़ा छुपाती हो।
वही शाम जिससे चिड़ियों की चहक से बाग खिल उठते हों,
वही शाम जो गर्म ज़मीन को शीत से सहलाती हो।
हां ये वही शाम है जो सूरज और चांद को मिलाती हो और अपने आंगन में बैठी प्रेमिका को, उसके प्रेमी की याद दिलाती हो...
जिसमें ना सूरज सी आग हो, ना चांद सा गुरूर, जिसके लिए खुद पूरा शहर रहता हो फितूर ।
हां, ये वही शाम है।।।
एक महीने पहले
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