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झुंझलाहट

Chitra Bisht

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झुंझलाहट से भर गया था मन बहुतेरा
        
                                                    
                            
आज मां ने फिर नहीं उठाया फोन मेरा

पता नहीं दिन भर क्या क्या करती है
फोन जैसी ज़रूरी चीज कहां धर देती है

घंटी बजती रहती है, फोन नहीं उठाती है
फिर कई दिन तक बात नहीं हो पाती है

सबसे महंगा मॉडल लाकर है दिया
लेकिन वही है हाल, क्या फायदा

बेटी लगातार कॉल लगा रहीं है
देखो घंटी भी बराबर जा रही है

आखिर एक दिन फोन आ ही गया उनका
मैं भी भरी बैठी थी, सुनाया जो मन में था

मां, आप भी कमाल करते हो
क्यों नहीं फोन उठा बात करते हो

उधर से डबडबाई हुई आवाज कानों में पड़ी
कैसी है तू, काम का बोझ ज्यादा तो नहीं

अपनी सेहत पर भी थोड़ा ध्यान दे
चाहे एक कामवाली और लगा ले

यहां पर सभी मजे में है
तुझे अक्सर याद है करते

उसी में मशगूल हो जाती हूं
और फ़ोन उठाना भूल जाती हूं

पिछले महीने चश्मा मुझसे गिर गया
एक कांच टूटा और दूसरा बाहर निकल गया

तेरा भाई जल्दी ही बनवा देगा
और फिर ऐनक का करना भी क्या

हां जब अचानक फोन बज उठता है
उत्तर देने वाला बटन नहीं दिखता है

जब तक क्या करना है समझ आता है
तब तक फ़ोन कट जाता है

और यहां कब आने का इरादा है
पहले बता देने में सबकी सुविधा है

तेरे कमरे में आजकल मोनू पड़ता है
कभी कभी नींद भी वहीं पूरी करता है

मेरा कमरा कितना खुला और हवादार है
कामवाली बाई को उसमें बड़ा आराम है

मेरा क्या है, अब तो नींद भी कम आती है
पीछे गोदाम की शांति मन को भाती है

बस वहीं एक खटिया लगा ली है
मेरा सामान भी तो जरा सा ही है

प्रभु कृपा से ज़िंदगी अच्छी कट रही है
बस एक तेरी चिंता है, कितना खट रही है

परेशान मत हो, बस अपना खयाल रखना
और कभी फोन न उठाऊं तो चिंता न करना
-चित्रा
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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