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सिर पर उठाए धुमता है

Chhaya Bele

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पर्वत की चोटी पर
        
                                                    
                            
वैसाख कि झुलसती धूप में
खिल उठता पलाश

पाषाण का सीना चीर कर
उग आता है पिपल

उखाड़कर फेंक देने पर भी
जड़े पकड़ लेती है बेलें

एक इंसान ही हैं
जो दुःखों के राई का
पहाड़ बनाकर
सिर पर उठाए धुमता है

 
10 घंटे पहले
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Anil Kumar

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