विषय शिव बसे हैं दिल में मेरे
शिव शंभू कृपा करना मुझको चरणों में लगा लेना,
कुछ पल की सेवा भक्ति को प्रसाद समझ पा लेना।
ह्रदय स्थल में आप विराजो दूजा कोई आ न पाए,
जीवन का हर तुम्हारे चरणों में मेरा ध्यान समाये।।
मेरे हित कितने कष्ट सहे तुमने साथ न तुमने छोड़ा कभी,
जब भी मन से पुकारा मैंने दौड़े चले आये तुम तभी।
वक्त की तराजू रही तौलती वजन मेरा रहा हमेशा भारी,
जीवन की हर घटना का तुमने पलड़ा संभाला तुमने तभी।।
मेरे दिल में बस कर रहना जब भी मैं पुकारूं तुम्हें,
आकर मेरे कष्ट निवारो हे शिव शंभू पार्वती पतये।
सब कुछ सौंप दिया चरणों में तुम्हारे हे दीनबंधु त्रिपुरारी,
बस इतनी सी कृपा करना धूप कष्ट की न आये कभी।।
चन्द्रमा को तुमने शीश पर विराजा नागों का हार बनाया,
गंगा को जटा में बांध प्रभु उसके वेग को खुद में समाया,
भूत प्रेत पिसाच निशाचर सभी है तुम्हारे भक्त प्यारे,
जिन पर तुम कृपा कर दो हो जायें फिर वारे न्यारे।।
देवों के हो देव तुम तुमसे बड़ा न कोई इस जगत में,
सच्चे मन से भक्ति करे जो तुम्हारी शक्ति समाये भक्त में।
मेरे मन मंदिर के दरवाजे खुले हैं तुम्हें बुलाता मैं प्रभु,
एक बार दर्शन देकर मेरा जीवन करो अब साकार प्रभु।।