विषय करवाचौथ
सज-धज कर प्रिया चली पति मिलन को,
रूप सुन्दरी धर सोलह श्रृंगार हुआ प्रेम साकार।
करवाचौथ का व्रत रख निभाया पति संग प्यार।
प्रकृति ने दिया आशीष पूर्ण रहे सदा तेरा संसार।।
प्रेम पति का मिले सदा जीवन में खुशियां बरसें,
तेरी चौखट पर आने को सदा सुखों के बादल तरसें
न कभी रहे तेरे जीवन में कोई दुःख का आधार
करवाचौथ का व्रत रख तूने पाया पति का प्यार।।
जैसे तू पति की सेवा करती ले मेरा आशीर्वाद
न मिले जीवन में तुझको कोई कड़वा व्यवहार।
बेटी तू मेरी है मैं मां बन दूं तुझको आशीर्वाद
पति को भगवान समझ करना तू उससे प्यार।।
इससे ही होगा जीवन में तेरा सदा सदा सत्कार,
कुशल रहे तेरा व्यवहार कुशल रहे तेरा व्यवहार।
मन की धारा बिगड़े न कभी सत्पथगामी तू बनना,
जीवन में अमृत बरसे तेरे सदा सदा बारम्बार।।
जैसे चकोर चंदा के तरसे वैसा रखना उससे प्यार
करवाचौथ का व्रत सुहाना सुखी रहें तेरा सुहाग।
प्रेम समन्वय स्थापित करना मन को तू काबू रखना
तेरे पति से ही होगा फिर जन्म जन्म का बेड़ा पार।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय