विज्ञापन

इस माटी के अमर सपूत

Chandra Makanday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस माटी के अमर सपूत दे गये अमिट जवानी।
        
                                                    
                            
इस माटी को चंदन समझ लिख गये अमर कहानी।।

भगतसिंह ने जान की बाजी लगाकर फांसी का फंदा चूमा।
उनकी शहादत देखकर अंग्रेजी हुकूमत का भी माथा घूमा।।

कुछ यह कहते फिरते लाठी से ही आजादी पाई है।
कितने शूरवीरों ने इस रणभूमि में अपनी जान गंवाई है।।

अपनी जान की परवाह न करके पीढ़ियों को पाला पोसा है।
जब जाकर भारत मां ने आजादी का सूरज देखा है।।

मत भूलो इस आजादी की कीमत सस्ती कभी नहीं होती है।
इसके बदले कितनी कुर्बानी धरा की खातिर देनी होती है।।

आज भगतसिंह को भूल चुके लोग इंसानियत खोते हैं।
इनकी हठधर्मी के कारण कितने लोग चुपके से रोते हैं।।

जातिवाद क्षेत्रवाद भाषावाद का ज़हर फैलाया जाता है।
वोट बैंक की खातिर चुपके-चुपके कितनों को मरवाया जाता है।।

वो आजादी के दिवाने ऊपर से इन संतानों को कोसते होंगे।
जिनकी खातिर उनके सपने बेदर्दी से तब उजड़े होंगे।।

सुखदेव भगत सिंह बिस्मिल जैसों ने जान की बाजी लगाई थी।
तब भी भीतर घाती लोगों ने देश की उम्मीदें मिटाई थीं।।

नेता सुभाष आजाद जैसे वीरों का बलिदान लोग भूल गए।
चरखे से आजादी के सपनों पर लोग खुशी से फिर झूम गये।।

नमन भगतसिंह को जयंती भगतसिंह की मनाना भूल गए।
धूम धड़ाका फिल्मों का उल्टे सीधे गानों पर लोग झूम गये।।

आओ मिलकर हम याद करें आजादी के उन परवानों को।
इस मिट्टी का चन्दन बनाकर तिलक करें हम उन दिवानों को।।

 
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjai kumar

103 कविताएं

View Profile