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श्मशान या मरघट

CHANDRA KANT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब आना ही इस पथ को तू और राह को क्यों जाये
        
                                                    
                            
चलता चल राही मेरी तरफ भले चाल तेरी कुछ मध्यम है ।

ये राह बनी बस तेरा साथी कोई और साथ न दे पाया
चलते चलते इस राह पे राही तेरी आँख भला अब क्यों नम है।

जो साथी थे संघाती थे वो और राह की ओर बढ़े
जब उनका साथ ही छूट गया तो राही तुझे अब क्यो गम है।

तुझे इस राह वो ही छोड़ चले जो कभी बड़े ही प्यारे थे
पर तेरी याद रखेगे दिल मे जिनके साथ रहा काफी कम है ।

धनिक खटिक राजे महाराजे मोची कुम्हार हो या किसान
मेरे लिये सब एक सदा मेरा भाव अथिति देवो भवम है।

जब होना ही है खाक अंत में तो इस काया पर कैसा गुमान
वो चाहे एक कोढ़ी की हो या वेश्या की देह स्वर्णम है।

ना यहाँ बारिश की चिंता न गर्मी का न सर्दी का डर
जब जी चाहे आ जाना राही तेरा स्वागत यहाँ पर हरदम है।

है मुझे खबर ये मेरे दर पर कोई नहीं कभी आना चाहे
छाया हुआ अजब सन्नाटा पर मुझे प्रिय ये मेरा निलयम् है ।

सिर्फ बचे अस्थियाँ ही केवल जो न है पहचान किसी की
बस निश्चल निस्तेज हो काया ऐसे हर तन का स्वागतम् है ।

हर एक को यहाँ है आना होता मुझसे यूँ डर कर ना भागो
जिसको लाये हो याद रखो बस तुमसे ही वो जरा प्रथम है ।

मेरी बांहे हाथ फैलाये तेरा स्वागत सदा रहेगी करती
है जग में एक प्राण भी बाकी मेरा आराम का नहीं धर्म है ।

मेरे दर से आ वापस जाना ये कभी मुमकिन ना हो पायेगा
जैसे नदियाँ न उलटा बहती विधि का यही अटल नियम है

सत्यम् है मेरे दर का ऑगन शिवम् तुम्हारे है ये कर्म
सत्य शिव का जब मिलन हो वो घड़ी बड़ी ही सुन्दरम् है ।

ना छोटा ना कोई यहाँ बड़ा ना खोटा ना कोई यहाँ खरा
जो भी आया चढ़ कंधो पर सबके लिये एक ही आदरम् है ।

दर्द यहाँ पर नहीं है बसता खुशी से मैं महरूम हमेशा
गम और खुशी के बीच अजब सा हर पल रहे यहाँ मौसम है ।

सोचो नहीं शिवाला बड़ा है या मधुशाला का वाकी घड़ा है
मेरे दर से ही जाना होगा चाहे कोई राम या रावणम् है ।

मरघट रख लो शम्शान ही रख लो या कह लो मुझको कब्रिस्तान
मेरा नाम न कोई रखना मुझपे गर अब भी कोई भ्रम है ।

मेरी तो रही पूछ हमेशा तुझको ही बस ध्यान नहीं
जो आया वो गुजरेगा ही जीवन बस यही आवागमन है।

मैं मंजिल हूँ तू राही है तुझे मुझको इक दिन पाना होगा
जितनी जल्दी आये मुझ तक तेरा जीवन उतना आनंदम् है।

बचपन भी मेरे दर पे आया जवानी भी आई बुढ़ापा भी
वो दोनो थे चिंता मे पर बचपन के लब पर रहा सुकूनम् है।

मेरे दर यूँ हंस के आना किसी के बस की बात नहीं है
अब तक ना कोई आया ऐसा वाकई तुझमे दस का दम है ।
4 घंटे पहले
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