विज्ञापन

जुल्फों की अठखेलियां

CHANDRA KANT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करती है तेरे चेहरे से अठखेलियाँ जुल्फें
        
                                                    
                            
तेरी है प्यारी प्यारी ये सहेलियाँ जुल्फें
दिल लिया करते थे दिल हुई बात पुरानी
देखो अब तो करती है दिल ले लिया जुल्फें
हमने जो छुआ तुनके उनको न कुछ कहा
दिन रात लबो से जो करे रंगरेलियाँ जुल्फें
कभी न देखा हमने उनके साथ किसी को
देखी है तो बस पायल या अकेली या जुल्फें
हुए है कई बार शराबी उनको देखे से
शक सा है इस दिल में वो आँखे थी या जुल्फें
जब कभी भी देखा तो टोक दिया गया हमे
जबकि हर लम्हा झुमके को छूने दिया जुल्फें
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Yunush khan

8144 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

650 कविताएं

View Profile

dev chauhan

232 कविताएं

View Profile