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अंदाजे इश्क़

CHANDRA KANT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टुकड़ा तो तुम्हे कभी यह मेरे दि ल का लगा ही नहीं
        
                                                    
                            
लगता है मिले वीराने सदा पता महफ़िल का लगा ही नहीं

मेरी प्यार की कश्ति सदा है भटकी मझधारों में तुफानो में
भवरों का ही इसने पाया है पता पता साहिल का लगा ही नहीं

चलते रहे अंजानो से बेखबर और बेखुदी में हम भी
राहो की रही खबर पता मंजि ल का लगा ही नहीं

लगता है कोई नहीं है मेरे क़त्ल का गवाहे चश्म
तभी तो अब तक पता मेरे कातिल का लगा ही नहीं

एक हल्का सा निशान है तेरे चेहरे पर भवों के नी चे
तभी तो एक नज़र में पता तेरे तिल का लगा ही नहीं
2 महीने पहले
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