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इंसान अब गाँव ढूँढ रहा है

Chande Paswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक बात बोलूं साहेब,आज कल इंसान गाँव को शहर बनाकर अब गाँव ढूँढ रहा है,
        
                                                    
                            
क्योंकि इंसान अब खुद ही शहर छोड़कर अपने शहर में जा रहा है न की गाँव में।
भले ही पैसा और महल हम सबके पास है लेकिन चैन सुकून किसी के पास नहीं है
बस इतनी सी बात समझना है विकास के नाम पर इंसान खुद का विनाश कर लिया है।

 
3 महीने पहले
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