बुद्धि, करुणा और मार्ग की कविता
मन की शांति में, अज्ञान फैला अपना जाल,
कर्म के बीज बिखरे, कुछ खिले, कुछ नाल।
वासनाएँ फुसफुसाईं, मोह बाँधे तन और मन,
अनंत चक्र घूमे, दिन के बाद रात का क्रम।
ये धर्मा हेतु-प्रभवाः… प्राचीन मंत्र गूँजता,
“सभी घटनाएँ कारण से उत्पन्न, उनका अंत भी सूझता।
तथागत दिखाते हैं, उत्पत्ति और मोक्ष का मार्ग,
दुःख के अंत की ओर, शांति भरता मन का भाग।”
धम्मपद फुसफुसाता, पाली की मधुर तान,
“मन अग्रणी है, कर्म बोया जाता है ध्यान।
सत्य और नैतिकता, विचार और श्रुतियाँ,
लालच और क्रोध को मिटाएँ, शुद्ध हो हृदय की गुनियाँ।”
हृदय सूत्र का स्वर, अलौकिक, उच्च और विशाल,
“गते, गते, पारगते…” समय से परे अमर हाल।
सभी रूप शून्य, फिर भी सब उत्पन्न होते हैं,
असक्त, मुक्त, बोधि का आदान-प्रदान होते हैं।
कमल सूत्र में खिलता उज्जवल सूर्य,
बुद्धत्व सभी में, सबको मिले अवसर।
करुणा बहती है, उपाया सुगम दिखाए,
सभी प्राणी जागें, सब हृदय पथ पाए।
वज्रसूत्र चमकता, बुद्धि की तलवार,
मोह और भ्रांतियाँ काटे, प्रकट करे आधार।
सभी क्षणिक हैं, कुछ भी न पकड़ो,
मुक्त करो मन, ज्ञान की धारा बहाओ।
शुद्ध भूमि, अमिताभ नाम पुकारे,
भक्ति और स्मृति से मन का मार्ग सजाए।
सरल और शुद्ध, विश्वास का प्रकाश,
हृदय को स्थिर करे, जीवन बनाए साक्षात।
**ओम मणि पद्मे हूँ**, कमल में रत्न चमके,
करुणा और बुद्धि का प्रकाश आपस में दमके।
क्रोध और लालच, सब ध्वनि में घुल जाए,
मुक्त मन की शांति, स्थिर हृदय पाए।
बारह बंधनों का चक्र, भाग्य और कर्म,
अज्ञान से दुःख तक, मोह और हानिकारक कर्म।
ज्ञान की तलवार से काटो, देखो कारण का मूल,
सदाचार और करुणा, फलस्वरूप शुद्ध और शूल।
चतुरारि सत्य प्रकट करें मार्ग उज्जवल,
दुःख है, कारण है, अंत संभव और सरल।
अष्टांगिक मार्ग खोलता मध्यम पथ,
सही दृष्टि, कर्म, साधना — जीवन में प्रभाव।
ध्यान करो, देखो, जागो मन,
सभी भ्रम टूटें, नश्वरता की पहचान हो सन।
सदाचार से कर्म, शब्दों में संयम,
गुण और करुणा, प्रार्थना का गहन प्रेम।
सभी सूत्र मिलें, प्रकाश की नदी बहती,
अंधकार मिटे, रात समाप्त होती।
आवेदनात्मक दर्शन, केवल शब्द नहीं,
मन रूपांतरित होता, बीज सही बोई।
मौन में, ध्वनि में, कमल के फूल में,
मुक्ति जागती, अंधकार बिखरता हर छूल में।
सभी प्राणी अनंत, सभी हृदय मुक्त,
बुद्धि और करुणा, शाश्वत जीवन का सृष्ट।