सबकी अपनी-अपनी सीमाएँ हैं,
पर, कवि की कल्पना की कोई सीमा नहीं है।
नौकरी में भी उम्र-सीमा है ,
प्रतियोगिता कविता लिखने में भी उम्र-सीमा है,
लेकिन, लाचार , बेबस, बेसहारा
बेरोज़गार व्यक्ति की कोई उम्र-सीमा नहीं है।