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चिराग शर्माने लगे- पुरानी डायरी से

Brijmohan Bisht

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शमां को देखकर परवाने जलने लगे।
        
                                                    
                            
आये वो महफिल मे तो चिराग शर्माने लगे।।

आफताब सा चेहरा है मेरे महबूब का।
देखकर आइने भी अब सर झुकाने लगे।।

कह दो शहर वालों से कि हमें भूल जाए।
उनकी ही गालियों मे अब हम गुजर करने लगे।।

सारी कायनात चूमती है उनके कदमों को।
और उनकी पनाह हमें जन्नत सी लगने लगे।।

उस कातिल से हमारी नज़रे क्या मिली।
ये दुनिया वाले हमें दुश्मन समझने लगे।।

होता है नशा देखकर उनके हुस्न को।
आँखें उनकी शराब का समन्दर लगने लगे।।

चलते है लहराकर जुल्फों को वो अपनी।
देखो शहर मे आज फिर घटा छाने लगे।।

कह दो उनको गुमनाम कि बेपर्दा न निकले।
देखकर उनको लोग अब पागल होने लगे।।
        - बृज मोहन सिंह बिष्ट
2 महीने पहले
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