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हैं रंग अनगिनत से

Brajesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हैं रंग अनगिनत से
        
                                                    
                            
जीवन के आसमाँ में
पर मुझको जो रंग पसंद है
जाने मगर कहां है
ढूँढता फिरूँ उसे मैं
फूलों में तितलियों में
सागर की तलहटी में
हरियाली वादियों में
फिर भी नहीं मिला वो
इतने बड़े जहां में
हैं रंग अनगिनत से...।
2 महीने पहले
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