कहते हैं,
छिपे हुए गड्ढों में
आसानी से हाथी गिर जाते हैं।
पर सच तो यह है,
सबसे सहज
प्रशंसा के गड्ढे में
मनुष्य ही गिरता है।"**
**"कहते हैं,
छिपे हुए गड्ढों में
आसानी से हाथी गिर जाते हैं।
पर सच तो यह है,
सबसे सहज
प्रशंसा के गड्ढे में
मनुष्य ही गिरता है।"**