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सच-झूठ

BIJAY TIWARI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच-झूठ शब्द हैं न्यारे,
        
                                                    
                            
जीवन जीने के सहारे।
पकड़ केवल एक की राह,
नहीं कर सकते संबंध निर्वाह॥
परिभाषा सत्य की देखें तो,
कल्याणकारी एक अभिवृत्ति।
"सत्यम् शिवम् सुंदरम्" द्वारा,
देता अपनी यह अनुभूति॥
मुंडकोपनिषद की लोकोक्ति,
शासक जिससे रहते चेते।
सत्य की अंतिम जय होगी,
दर्शाता "सत्यमेव जयते"॥
विवेचित विश्लेषणों से पाया,
सत्य वही जो जन-स्वीकार्य।
लोक-कल्याणकारी-कृति या,
जिसकी अंतिम जय हो जाय॥
विजय या लोक-कल्याण में,
लेना पड़े गर झूठ सहारा।
सच हेतु झूठ, झूठ हेतु सच,
परस्पर देते हैं सहारा॥
झूठ पर केवल आश्रित होना,
नहीं स्वीकारना तथ्य।
मूल्यहीन विचार है लाता,
व्यक्तित्व बनाता अपथ्य॥
  -बिजय बहादुर तिवारी
2 सप्ताह पहले
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