विज्ञापन

कृतघ्नता देखते हैं, सर पीट-पीटकर

BIJAY TIWARI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिये जिनके लिए,   मर मिट मिटकर
        
                                                    
                            
कृतघ्नता देखते हैं, सर पीट-पीटकर
लंगी मारकर उन्हींने लंगड़ा बना दिया
खिंच  रहे जिंदगी, घसीट-घसीट कर।।
जिये जिनके लिए,   मर मिट मिटकर
......
बचाये जिनके लिए जोड़ जोड़कर
इच्छाएं,आवश्यकताएं निचोड़ निचोड़ कर
उनकी जब आई सेवाएं देने  की बारी
रख दिया वात्सल्यता को कोड़ कोड़ कर।
हम देखते रह जाते दांत पीस-पीसकर।।
जिये जिनके लिए,   मर मिट मिटकर।
...........
विपत्ति, संकट में, जिनके साथ थे खड़े
सहायतार्थ मेरी ओर,उनके हाथ नहीं बढ़े
मज़ाक उड़ाते हैं  मेरी परिस्थितियों का
हाय! कर निकलते गाड़ियों में चढ़े चढ़े
मुंह छिपाकर निकलते है भीत भीत कर।।
जिये जिनके लिए,   मर  मिट मिटकर।।
   ......
     जो शर्म से गुजरते नहीं थे मेरे द्वारे से
चिढ़ाते आज मुझे वे अपने चौबारे से
अहसान फरामोश ड्योढ़ीवाले क्या हुए
नज़र मिलाने लगे,  मूंछें ऐंठ ऐंठकर।
जिये जिनके लिए,   मर  मिट मिटकर।।
.......
    
  
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all