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दुनिया हुई तनाव ग्रसित

BIJAY TIWARI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बस कुछ लोग , कभी-कभी, पाये जाते हैं हर्षित।।
        
                                                    
                            
सारी दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।

बदले कार्यभार,जीवनशैली
जीवन रेखा   हुई मटमैली
शारीरिक श्रम हुआ सिफर
मेहनत से   लगने लगा डर
श्रमाश्रित से हुए मशीनाश्रित।।
सारी दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।

विलासिता बनी  आंदोलन
प्रकृति का होता अंधदोहन
सुविधाएं खुद मे बनी तनाव
बढ़े भावनात्मक,मानसिक दबाव।
अपने ही कर रहे ,हम अपना स्वयं अहित।।
सारी दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।

कार्य-जीवन का असंतुलन
हुआ व्याप्त     सारा भुवन
बढ़ रहा, मानसिक संताप
हृदय रोग,  और रक्त चाप।।
देय राशि,करा रही, स्वास्थ्य व शांति अर्जित।
सारी दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।

हर दिन  बुलाने पड़ते बैद्य
अवसादग्रस्त,अपने मे कैद
हर दूसरा लिए, स्थूल देह
हर तीसरे को घेरे, मधुमेह
भोजन  मात्रा ,भोज्य,चिकित्सको ने , किए सीमित।
सारी दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।

पुरातन कार्यों मे थे  सम्मिलित
श्रम,सामूहिकता,और संगीत
आज शांति का करने आभास
जाते समाज से दूर प्रकृति पास ।।
अतिभौतिकवादिता ने किया
चैन शांति  विसर्जित।।
सारी दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।

रहने हेतु     तनाव मुक्त
शौक़,योग,निंद,उपयुक्त
भ्रमण,लेखन, बागवानी
करें दूर मानसिक परेशानी।
रहे शांत,सहजता कर सृजित।।
सारी दुनिया हुई, तनाव ग्रसित।।


 
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