विज्ञापन

बारिश और तू...

Bhupendra Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ठंडी हवा, काले बादल, चमकती बिजली का रंग,
        
                                                    
                            
उस पल लगा जैसे तू ही हो मेरे संग।
कुछ लम्हों को वक्त भी ठहर सा गया,
जैसे तू मेरे बिल्कुल करीब आता गया।

बारिश की हर बूंद जब तन को छू जाती थी,
तेरी याद दिल में और गहरी उतर जाती थी।
भीगता हुआ ये मौसम कुछ यूँ कह गया,
जैसे तेरी भीगी जुल्फों का साया मिल गया।

तेरा दुपट्टा हवा में जब लहराता होगा,
दिल मेरा तेरे पास खुद चला जाता होगा।
मन किया तुझे बाहों में भर के रोक लूं,
इस भीगे मौसम को तेरे नाम कर दूं।

गोद में उठाकर तुझे आसमान दिखा दूं,
तेरी हंसी से अपनी दुनिया सजा दूं।
तेरी जुल्फों के साए में ये दिल ठहर जाए,
हर ख्वाब मेरा बस तुझमें ही बिखर जाए।

बारिश, ये हवा, ये मौसम सब गवाह रहें,
कि मेरी हर धड़कन में बस तू ही रहे।
ये पल, ये एहसास कहीं खो ना जाए,
काश ये दूरी भी आज बारिश में धुल जाए…
-भूपेंद्र कुमार शर्मा
5 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Mamta Tiwari

650 कविताएं

View Profile

dev chauhan

232 कविताएं

View Profile