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राजनीति की बिसात

Bhuneshwar Anant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राजनीति की बिसात
        
                                                    
                            
में मोहरे बड़े बिझे है ।
यहां हर प्यादा चालाक समझता है
उनके ख्वाब भी बड़े ऊंचे है ।।

रात हो गई गमगीन
बोली लगा रहा था गिनगिन ।
क्यो छोड़ी थी इंसानियत
कहां है तेरे पीछे की चाहत॥

बंदुक किसी और का कंधे किसी और का
चलाने वाला कहीं और का ।
आज प्यादा बड़ा खुश हुआ
छोड़ चले अकेले तब
सैदाई को बड़ा दुःख हुआ ।।

इसीलिये तो कहता हुं
राजनीति के बिसात के मोहरे मत बन ।
लगा दे अपना सर्वर्सव
अपने मंजिल मे
सफलता की झंकार बाजे छन छन ।।


- भुनेश्वर अनंत 
2 घंटे पहले
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