विज्ञापन

चांदनी रात थी, भरी बरसात थी

Bhuneshwar Anant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाँदनी रात थी, भरी बरसात थी,
        
                                                    
                            
गोरी के संग वो पहली मुलाकात थी।
खुदा कसम, उसमें क्या बात थी,
जैसे बरसों की कोई मुलाकात थी।

जुगनू की तरह चमकती थीं आँखें,
उन आँखों में थीं मोहब्बत की राहें।
मन प्रसन्न हुआ गोरी को देखकर,
दिल झूम उठा उसे अपने पास पाकर।

भरी महफ़िल में कर दिया दीदार,
दिल हो गया मेरा बेक़रार।
बगल में बैठे तारे ने बोला—
“रे आनंद, तू हो गया मालामाल!”

चाँदनी रतिया में मैं चाँद को बोला—
“शुक्रिया, तूने आज क्या खूब दिखाया,
अँधेरी रात में मुझे चाँद दिखाया।”

बगल में बैठे भँवरे ने कहा—
“झन इतरा रे आनंद, जरा फूल लेके आ,
गोरी के बालों में गजरा लगाके आ।
आज जो मिला है ऐसा प्यार,
उसका कर ले तू सिंगार।”

कर लिया मैंने चाँद का दीदार,
धन्य हुआ मैं, जैसे चला चाँद के पार।
बरसे जैसे नैनों से अश्रु की धार,
दिल भर आया पाकर इतना प्यार।

उस पल में कुछ ऐसा एहसास हुआ,
जैसे मेरा हर सपना साकार हुआ।

मन बावरा हुआ जा रहा था
जब मिला मुझे उसका सच्चा प्यार।




                   
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all